मनकामेश्वर मठ-मंदिर में श्रीमहंत देव्यागिरि की अगुआई में हुआ तुलसी का विवाह

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डालीगंज स्थित उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित मनकामेश्वर मठ-मंदिर में श्रीमहंत देव्यागिरि की अगुआई में हुआ तुलसी का विवाह

लखनऊ: डालीगंज स्थित उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित मनकामेश्वर मठ-मंदिर में श्रीमहंत देव्यागिरि की अगुआई में तुलसी का विवाह विधिविधान से सोमवार 15 नवम्बर को हुआ। इसमें लक्ष्मी स्वरूपा तुलसी देवी, दुल्हन बनी और विष्णु स्वरूपा शालीग्राम दुल्हे। शंखनाद, ढोल, ताशे, मंजीरे, जयकारों और विवाह गीत के साथ देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह सम्पन्न हुआ।

 

मंदिर परिसर में गर्भ गृह और श्रीमहंत की गद्दी के बीच खुले परिसर में फूलों, अक्षत, रोली और दीपकों की विशाल रंगोली सजायी गई थी। गन्ने के मंडप तले देवी तुलसा और शालीग्राम को विराजमान करवाकर पूजन अनुष्ठान किये गए। रेखा मिश्रा की महिला मंडली ने हल्दी, स्वागत विवाह आदि के पारंपरिक गीत गाकर पूरा इस अनुष्ठान में जोश भर दिया। “आज हवे तुलसी के लगनवा अंगनवा बीचे”जैसे गीतों पर उत्साहित भक्त झूम उठे। सोमवार, देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह के कारण पूरे परिसर को फूलों, रौशनी से अलंकृत किया गया था। भक्तों की कतार भी सुबह से लेकर देर शाम आरती तक लगी रही।

 

श्रीमहंत देव्यागिरि ने गमले में स्थापित देवी तुलसी को माता की चुनरी ओढ़ायी। नया लाल जोड़ा पूरे श्रंगार के साथ भेंट किया। उसमें दर्पण, कंघा, बिंदी, सिन्दूर, आलता, मेंहदी, लाल कांच की चूड़ियां आदि शामिल थीं। इसके बाद उन्होंने तुलसी देवी के पत्रों पर रोली, अक्षत अर्पित किये। पंच द्रव्यों से अभिषेक किया और दीपक धूप पुष्प मिष्ठान फल आदि चढ़ाए। इस क्रम में सिंहासन पर विराजमान शालीग्राम देवी को वस्त्र आदि अर्पित कर वैदिक मंत्रों के साथ विवाह अनुष्ठान करवाया गया। श्रीमहंत देव्यागिरि ने कहा कि जिस आंगन में तुलसा देवी होती है उस घर से रोग और कष्ट दूर रहते हैं। वैज्ञानिकों ने भी तुलसी के महत्व को स्वीकार किया है। ऐसे में तुलसी में जल अर्पित करने और तुलसी के नियमित सेवन से व्यक्ति निरोगी रहते हुए कामनाओं की पूर्ति कर सकता है।

 

सेवादार उपमा पाण्डेय ने तुलसी विवाह कथा पाठ के क्रम में बताया कि एक बार माता तुलसी ने भगवान विष्णु को नाराज होकर श्राप दे दिया था कि तुम काला पत्थर बन जाओ. जिसके बाद इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु ने शालीग्राम पत्थर के रूप में अवतार लिया और तुलसी से विवाह किया. तभी से शालीग्राम और तुलसी के विवाह को एक त्योहार के तौर पर मनाया जाता है। इस अवसर पर महिला संत ऋतुजा गिरि, गौरजा गिरि कल्याणी गिरि सेवादार आलोक वर्मा, जगदीश गुप्ता अग्रहरि सहित अन्य उपस्थित रहे।

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